रविवार, 25 जुलाई 2010
സ്റ്റോറി റിവ്യൂ പീപ്ളി live
शुक्रवार, 2 जुलाई 2010
शनिवार, 19 जून 2010

नदीम श्रवण हिंदी फिलिमी दुनिया की दो राजा है. १९९० से २००० तक वो अपनी धुन से हिन्दुस्तान ही नहीं सरे दुनिया को गुन गुनाया था. न जाना क्यों वो अपनी राह दूसरे शैतानो को छोड़ दिया. इन दोनों की उंगली से जो आवाज़ आई . कोई भी ना कामयाबी रही. सब सोंग एक से बढकर बेहत था. दोस्तों देखिये अब की फ़िल्मी दुनिया की हालात - स्टोरी म्यूजिक को कोई जगह नहीं . बल्कि लड़की की नंगे तन कहीं . एक सिनिमा दर्शक क्या चाहता है , अब वो नहीं मिलती. अक्षय कुमार बूटा होते भी नन्हा बच्चा बनकर झूम चूम नाचती है. हिमेश रश्मिया अपनको बाल बनाके
कोई ..गीता रामायण खुरान पढाई जैसी बकवास करती है. नदीम श्रवण अब ये जमाने को डरता है . इसलिए वो
अपनी डरती उंगली से "डो नोट डिस्टर्ब " केलिए जो धुन बनायी वो एक दम बुरा लगी. हम कुछ आदमियों को नदीम की ज़रुरत है .. प्लीस आ जा ...और हिंदी म्यूजिक को बजाओ.