शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

1 टिप्पणी:

  1. हम है भारत माँ की सपूत
    लड़ रहे हम अनरीत के खिलाफ I
    कर रहे है हम माँ की पहरा
    जाग रहे है हम हर दिन रात I

    हमको किसी की परवाह नहीं
    जिनको हम से लड़ना है I
    जो कुछ भी हो सह सकेंगे
    क्योकि, जिंदा है हम तेरेलिए I

    हम बहाती गर्म पसीना
    जहां पिघलती ठंडा हिमाजल I
    हम बहेंगे अपनी गर्मी खून
    जहां खिलती नर्मी गुलाब

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